अध्याय 36 टकराव

अंबर रंग के लैम्पशेड की गरमाहट भरी रोशनी में सिलस मानो सुनहरी चमक में नहाया हुआ दिख रहा था।

उसके चौड़े कंधे पतली कमर तक सिमटते थे; उसकी देह-भाषा बिलकुल तनी हुई, सलीकेदार—एक हाथ पर ठुड्डी टिकाए, दूसरा यूँ ही सोफ़े की बाँह पर ढीला-सा पड़ा था।

उसने एस्ट्रिड की नज़रों से नज़रेँ मिलाईं—शांत, जैसे प...

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